दिल्ली में SIR अभियान शुरू: घर-घर पहुंच रहे BLO, वोटर लिस्ट सत्यापन के लिए भरवाए जा रहे फॉर्म, जानिए पूरी प्रक्रिया

दिल्ली में SIR अभियान शुरू, घर-घर पहुंच रहे BLO, वोटर लिस्ट सत्यापन के लिए भरवाए जा रहे फॉर्म


राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान की शुरुआत हो चुकी है। इस अभियान के तहत निर्वाचन आयोग की ओर से बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। उनका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और हर योग्य नागरिक का नाम सही तरीके से दर्ज करना है।

अभियान के पहले ही दिन कई इलाकों में BLO लोगों को फॉर्म वितरित करते हुए नजर आए। लोगों को फॉर्म भरने की प्रक्रिया समझाई जा रही है और यदि किसी को किसी तरह की परेशानी हो रही है तो मौके पर ही उसकी मदद भी की जा रही है।

चांदनी चौक से शुरू हुआ घर-घर संपर्क अभियान

दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में भी SIR अभियान की शुरुआत हो गई है। यहां बड़ी संख्या में BLO और सुपरवाइजर मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं।

एक BLO ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में कई बूथों पर टीमें बनाई गई हैं जो घर-घर जाकर फॉर्म वितरित कर रही हैं। प्रत्येक परिवार को अलग-अलग फॉर्म दिए जा रहे हैं ताकि परिवार के हर योग्य मतदाता का रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट किया जा सके।

हर परिवार को दी जा रही दो प्रतियां

निर्वाचन आयोग की ओर से दिए जा रहे फॉर्म की दो प्रतियां तैयार की गई हैं।

एक प्रति मतदाता भरकर BLO को वापस देगा, जबकि दूसरी प्रति वह अपने रिकॉर्ड के लिए अपने पास रखेगा। इससे भविष्य में यदि किसी प्रकार की जानकारी की जरूरत पड़े तो मतदाता के पास भी उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

BLO ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए अपनाई गई है।

फॉर्म में कौन-कौन सी जानकारी भरनी होगी

फॉर्म में मतदाता से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी जा रही हैं।

यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में था तो उससे उस समय का विधानसभा क्षेत्र (Assembly Constituency), पोलिंग स्टेशन नंबर और मतदाता सूची में उसका क्रमांक (Serial Number) पूछा जा रहा है।

इन जानकारियों के आधार पर निर्वाचन आयोग पुराने रिकॉर्ड से नए रिकॉर्ड का मिलान करेगा।

2002 का रिकॉर्ड नहीं होने पर क्या होगा

कई ऐसे युवा मतदाता भी हैं जिनका वोटर कार्ड हाल के वर्षों में बना है और उनका नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं था।

ऐसे मामलों में उनके माता-पिता या परिवार के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जानकारी जोड़ी जाएगी। यदि परिवार के किसी सदस्य का नाम पहले से मतदाता सूची में मौजूद है तो नए मतदाता को उसी परिवार से लिंक किया जाएगा।

इस प्रक्रिया से नए मतदाताओं का सत्यापन आसान हो जाएगा।

नए मतदाताओं के लिए अलग व्यवस्था

यदि कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता बना है और उसका पहले का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो उसके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

ऐसे मतदाता से उसकी पूरी व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी ताकि उसका नाम सही तरीके से मतदाता सूची में दर्ज किया जा सके।

निर्वाचन आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

2002 का डेटा नहीं मिलने पर कैसे मिलेगी मदद

अभियान के दौरान सबसे ज्यादा सवाल वर्ष 2002 के रिकॉर्ड को लेकर पूछे जा रहे हैं।

कई लोगों को यह नहीं पता कि उनका पुराना मतदान रिकॉर्ड कहां मिलेगा। BLO ने बताया कि इसके लिए निर्वाचन आयोग ने कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

ऑनलाइन रिकॉर्ड देखने की सुविधा भी दी गई है और BLO के पास भी पुरानी सूची उपलब्ध है। यदि किसी व्यक्ति को जानकारी नहीं मिलती तो BLO स्वयं उसकी सहायता करेंगे।

ECI NET ऐप से मिलेगी जानकारी

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए ECI NET नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया है।

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता अपने पुराने रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि किसी को अपना विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग स्टेशन या पुराना रिकॉर्ड याद नहीं है तो इस प्लेटफॉर्म की मदद ली जा सकती है।

BLO ने लोगों से अपील की है कि वे इस सुविधा का उपयोग करें ताकि फॉर्म भरने में आसानी हो।

घर पर नहीं मिलने पर क्या करेंगे BLO

यदि किसी घर पर पहली बार जाने के दौरान कोई सदस्य मौजूद नहीं मिलता तो BLO वहां एक सूचना पर्ची चिपका देते हैं।

इस पर्ची पर BLO का नाम, मोबाइल नंबर और पहली विजिट की तारीख लिखी होती है।

इसके बाद संबंधित व्यक्ति BLO से संपर्क कर सकता है या फिर BLO दोबारा उसी पते पर पहुंचते हैं।

जरूरत पड़ने पर तीसरी बार भी विजिट की जा सकती है, हालांकि अधिकांश मामलों में पहली या दूसरी विजिट में ही प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

लोगों के सवालों का मौके पर दिया जा रहा जवाब

SIR अभियान के पहले दिन कई लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि यह प्रक्रिया आखिर क्यों की जा रही है।

BLO और सुपरवाइजर लोगों को बता रहे हैं कि यह मतदाता सूची को अपडेट करने की नियमित प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य सही मतदाताओं का रिकॉर्ड तैयार करना है।

यदि किसी को फॉर्म भरने में परेशानी होती है तो टीम मौके पर ही उसकी सहायता कर रही है।

सुपरवाइजर भी रख रहे हैं पूरी निगरानी

हर विधानसभा क्षेत्र में BLO के साथ सुपरवाइजर भी तैनात किए गए हैं।

सुपरवाइजर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी BLO सही तरीके से घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करें और लोगों को पूरी जानकारी दें।

साथ ही यदि किसी क्षेत्र में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो उसका तुरंत समाधान किया जा सके।

दूसरे राज्यों के रिकॉर्ड भी किए जा सकते हैं सत्यापित

यदि कोई मतदाता पहले किसी दूसरे राज्य में रहता था और बाद में दिल्ली आया है तो उसका रिकॉर्ड भी सत्यापित किया जा सकता है।

निर्वाचन आयोग के डिजिटल सिस्टम में विभिन्न राज्यों की मतदाता सूची उपलब्ध है। यदि व्यक्ति अपने पुराने मतदान क्षेत्र की जानकारी दे देता है तो उसके रिकॉर्ड को खोजने में आसानी होती है।

हालांकि यदि पूरी जानकारी उपलब्ध न हो तो रिकॉर्ड खोजने में थोड़ा समय लग सकता है।

रिकॉर्ड खोजने में क्यों लगता है समय

BLO के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को केवल राज्य का नाम याद है और बाकी जानकारी उपलब्ध नहीं है तो रिकॉर्ड खोजने में समय लग सकता है।

कई लोगों के नाम और पिता का नाम समान होने के कारण सही रिकॉर्ड तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगता है।

ऐसे मामलों में परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी काफी मददगार साबित होती है।

लोगों में दिखी थोड़ी झिझक

अभियान के पहले दिन कुछ लोगों ने BLO से सवाल किया कि हाल ही में उन्होंने जनगणना या अन्य सरकारी सर्वे के लिए जानकारी दी थी, फिर दोबारा जानकारी क्यों मांगी जा रही है।

कुछ लोगों ने शुरुआत में BLO की पहचान को लेकर भी सवाल किए।

इस पर निर्वाचन आयोग की टीम लोगों को समझा रही है कि SIR अभियान केवल मतदाता सूची के सत्यापन और अपडेट के लिए चलाया जा रहा है तथा इसका उद्देश्य योग्य मतदाताओं का रिकॉर्ड सही रखना है।

लोगों से सहयोग की अपील

निर्वाचन आयोग की टीम लोगों से लगातार सहयोग की अपील कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि BLO आपके घर आएं तो उन्हें सही जानकारी दें, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं और फॉर्म समय पर भरकर जमा करें।

इससे मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया समय पर पूरी होगी और भविष्य में मतदान के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।


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