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ईरान की इंटरनेट केबल धमकी: क्या दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है? भारत पर कितना




ईरान की इंटरनेट धमकी से दुनिया में हड़कंप

दुनिया इस समय पहले से ही तेल और गैस संकट की आशंका से जूझ रही है। स्टेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच ईरान की ओर से दिया गया एक नया बयान पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गया है। यह मामला सिर्फ तेल या युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इंटरनेट और डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुका है।

ईरान के कुछ अधिकारियों की ओर से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर शुल्क लगाने और उन्हें नियंत्रित करने जैसी बातें कही गई हैं। इसके बाद दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है कि अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचा या इनके रास्ते में रुकावट आई, तो क्या दुनिया का इंटरनेट प्रभावित हो सकता है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका असर भारत पर कितना पड़ेगा।


समुद्र के नीचे कैसे चलता है दुनिया का इंटरनेट

से लोगों को लगता है कि इंटरनेट केवल सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन सच इससे अलग है। दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट डेटा का ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। यही केबल्स अलग-अलग देशों को आपस में जोड़ती हैं।

इन केबल्स के जरिए ही अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, वीडियो कॉल, क्लाउड सर्वर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और बड़े डाटा सेंटर काम करते हैं। आसान भाषा में कहें तो पूरी डिजिटल दुनिया इन्हीं केबल्स पर टिकी हुई है।

अगर किसी कारण से इन केबल्स में बड़ी रुकावट आती है, तो सिर्फ इंटरनेट स्लो नहीं होगा बल्कि कई जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।


ईरान ने क्या कहा है 

हाल ही में ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जॉल्फ गरी के बयान ने दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स के इस्तेमाल पर शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन इस बयान ने चिंता जरूर बढ़ा दी है।

अगर किसी देश ने इंटरनेट केबल्स के रास्ते को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो इसका असर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। क्योंकि दुनिया की कई अहम इंटरनेट लाइनें मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों से गुजरती हैं।


स्टेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण

स्टेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही इलाका इंटरनेट के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

इस क्षेत्र से कई बड़ी इंटरनेट केबल्स गुजरती हैं जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ती हैं। इनमें Falcon, GBI और 2Africa जैसी प्रमुख केबल्स शामिल हैं। अगर इस इलाके में कोई बड़ा विवाद होता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो कई देशों की इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।


भारत पर क्या असर पड़ सकता है

भारत के लिए यह मामला काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की कई इंटरनेट कनेक्टिविटी लाइनें इन्हीं अंतरराष्ट्रीय केबल्स से जुड़ी हुई हैं। मुंबई और चेन्नई जैसे शहर बड़े इंटरनेट गेटवे के रूप में काम करते हैं।

भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे Jio और Airtel भी इन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में अगर समुद्री केबल्स पर कोई असर पड़ता है, तो भारत में इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है।

इसके अलावा कई ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। जैसे:

यूपीआई पेमेंट में देरी

ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं पर असर

वीडियो स्ट्रीमिंग में समस्या

क्लाउड आधारित ऑफिस सिस्टम धीमे पड़ना

अंतरराष्ट्रीय कॉल और वीडियो मीटिंग प्रभावित होना

हालांकि पूरी तरह इंटरनेट बंद होने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है क्योंकि दुनिया के पास वैकल्पिक रूट भी मौजूद हैं। लेकिन अगर बड़ा संकट पैदा होता है तो डिजिटल सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।


क्या पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब समुद्र के नीचे की केबल्स चर्चा में आई हैं। कई बार प्राकृतिक कारणों, जहाजों के एंकर या तकनीकी खराबी की वजह से केबल्स को नुकसान पहुंच चुका है।

2024 में भी कुछ समुद्री केबल्स के क्षतिग्रस्त होने के बाद कई क्षेत्रों में इंटरनेट ट्रैफिक प्रभावित हुआ था। उस समय इंटरनेट स्पीड में गिरावट और नेटवर्क समस्याएं देखने को मिली थीं।

यही वजह है कि अब दुनिया समुद्री इंटरनेट नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर हो गई है।


क्या सच में दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है

पूरी दुनिया का इंटरनेट एक साथ बंद होना लगभग असंभव है। क्योंकि इंटरनेट नेटवर्क कई अलग-अलग केबल्स और रूट्स पर आधारित है। अगर एक रास्ता प्रभावित होता है तो ट्रैफिक दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है।

लेकिन अगर किसी महत्वपूर्ण क्षेत्र में लंबे समय तक संकट बना रहता है, तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। खासतौर पर वे देश जो सीमित केबल नेटवर्क पर निर्भर हैं।

इसलिए खतरा पूरी तरह इंटरनेट बंद होने का कम, लेकिन सेवाओं में बड़ी रुकावट का ज्यादा माना जा रहा है।


ज़रूरी बात

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब केवल सैन्य या तेल संकट तक सीमित नहीं रहा। इसका असर डिजिटल दुनिया तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स आज पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी हैं।

भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि पूरी तरह इंटरनेट बंद होने जैसी स्थिति फिलहाल दूर है, लेकिन किसी भी बड़े संघर्ष का असर इंटरनेट सेवाओं और ऑनलाइन सिस्टम पर जरूर पड़ सकता है।

आने वाले समय में दुनिया को सिर्फ सीमा सुरक्षा ही नहीं बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा।

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