ईरान की इंटरनेट धमकी
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह यही सवाल उठ रहा है कि आखिर तेल इतना महंगा क्यों हो रहा है। इसी मुद्दे पर एक टीवी बहस के दौरान बीजेपी और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बहस में रूस से तेल खरीदने, राज्यों के VAT टैक्स, वैश्विक संकट और आम जनता पर पड़ रहे असर को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए।
बहस के दौरान नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आखिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के पीछे असली वजह क्या है और आम जनता को राहत क्यों नहीं मिल पा रही है।
रूस से तेल खरीदने पर क्यों छिड़ा विवाद
डिबेट की शुरुआत रूस से तेल खरीदने के मुद्दे से हुई। विपक्ष की तरफ से सवाल उठाया गया कि पहले सरकार रूस से तेल खरीदने को लेकर अलग बयान देती थी, लेकिन बाद में खरीदारी बढ़ा दी गई। इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इस पूरे मुद्दे को राजनीति के नजरिए से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि 2004 से 2014 के बीच रूस और ईरान से कितना तेल खरीदा गया और 2014 के बाद कितना खरीदा गया। उनका दावा था कि अगर आंकड़ों की तुलना की जाए तो पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
बहस के दौरान यह भी कहा गया कि जब दुनिया में तेल संकट बढ़ा तो भारत ने अपनी जरूरतों के हिसाब से कई देशों से तेल खरीदना शुरू किया। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
डिबेट में बढ़ी गर्मी, नेताओं के बीच तीखी बहस
तेल की कीमतों पर चर्चा के दौरान बहस कई बार गर्म हो गई। एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बीच नेताओं ने निजी टिप्पणियां भी करनी शुरू कर दीं। एंकर को कई बार बीच में दखल देकर माहौल शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी।
बीजेपी प्रवक्ता ने विपक्षी दलों पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं विपक्ष की ओर से कहा गया कि सरकार लगातार टैक्स बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डाल रही है।
डिबेट में पंजाब सरकार, आम आदमी पार्टी और विभिन्न राज्यों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चर्चा हुई। नेताओं ने एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने के आरोप लगाए।
आखिर पेट्रोल इतना महंगा क्यों है
बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यही रहा कि आखिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार ऊंची क्यों बनी हुई हैं। सरकार की तरफ से कहा गया कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक संकट है।
सरकार का दावा है कि दुनिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसी वजह से कई देशों में ईंधन महंगा हुआ है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि 83 दिनों तक सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं और रिजर्व तेल का इस्तेमाल करके हालात संभालने की कोशिश की गई।
VAT को लेकर राज्यों पर सवाल
डिबेट के दौरान VAT यानी वैल्यू एडेड टैक्स का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि कई राज्यों में VAT बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से वहां पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है।
बहस में तेलंगाना, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों का नाम लिया गया। कहा गया कि इन राज्यों में VAT की दर काफी ज्यादा है। बीजेपी का आरोप था कि राज्य सरकारें टैक्स कम करने के बजाय राजनीति कर रही हैं।
सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, लेकिन कई राज्यों ने VAT कम नहीं किया। इसी वजह से जनता को पूरी राहत नहीं मिल पाई।
विपक्ष का क्या कहना है
रूस से तेल, VAT और वैश्विक संकट पर सियासी संग्राम, आखिर जनता को कौन बता रहा सही सच?
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह यही सवाल उठ रहा है कि आखिर तेल इतना महंगा क्यों हो रहा है। इसी मुद्दे पर एक टीवी बहस के दौरान बीजेपी और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बहस में रूस से तेल खरीदने, राज्यों के VAT टैक्स, वैश्विक संकट और आम जनता पर पड़ रहे असर को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए।
बहस के दौरान नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आखिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों के पीछे असली वजह क्या है और आम जनता को राहत क्यों नहीं मिल पा रही है।
रूस से तेल खरीदने पर क्यों छिड़ा विवाद
डिबेट की शुरुआत रूस से तेल खरीदने के मुद्दे से हुई। विपक्ष की तरफ से सवाल उठाया गया कि पहले सरकार रूस से तेल खरीदने को लेकर अलग बयान देती थी, लेकिन बाद में खरीदारी बढ़ा दी गई। इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इस पूरे मुद्दे को राजनीति के नजरिए से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि 2004 से 2014 के बीच रूस और ईरान से कितना तेल खरीदा गया और 2014 के बाद कितना खरीदा गया। उनका दावा था कि अगर आंकड़ों की तुलना की जाए तो पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
बहस के दौरान यह भी कहा गया कि जब दुनिया में तेल संकट बढ़ा तो भारत ने अपनी जरूरतों के हिसाब से कई देशों से तेल खरीदना शुरू किया। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
डिबेट में बढ़ी गर्मी, नेताओं के बीच तीखी बहस
तेल की कीमतों पर चर्चा के दौरान बहस कई बार गर्म हो गई। एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बीच नेताओं ने निजी टिप्पणियां भी करनी शुरू कर दीं। एंकर को कई बार बीच में दखल देकर माहौल शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी।
बीजेपी प्रवक्ता ने विपक्षी दलों पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं विपक्ष की ओर से कहा गया कि सरकार लगातार टैक्स बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डाल रही है।
डिबेट में पंजाब सरकार, आम आदमी पार्टी और विभिन्न राज्यों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चर्चा हुई। नेताओं ने एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने के आरोप लगाए।
आखिर पेट्रोल इतना महंगा क्यों है
बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यही रहा कि आखिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार ऊंची क्यों बनी हुई हैं। सरकार की तरफ से कहा गया कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक संकट है।
सरकार का दावा है कि दुनिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसी वजह से कई देशों में ईंधन महंगा हुआ है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि 83 दिनों तक सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं और रिजर्व तेल का इस्तेमाल करके हालात संभालने की कोशिश की गई।
VAT को लेकर राज्यों पर सवाल
डिबेट के दौरान VAT यानी वैल्यू एडेड टैक्स का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि कई राज्यों में VAT बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से वहां पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है।
बहस में तेलंगाना, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों का नाम लिया गया। कहा गया कि इन राज्यों में VAT की दर काफी ज्यादा है। बीजेपी का आरोप था कि राज्य सरकारें टैक्स कम करने के बजाय राजनीति कर रही हैं।
सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, लेकिन कई राज्यों ने VAT कम नहीं किया। इसी वजह से जनता को पूरी राहत नहीं मिल पाई।
विपक्ष का क्या कहना है
विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार खुद भी पेट्रोल और डीजल पर भारी टैक्स वसूल रही है। उनका आरोप है कि सरकार आम लोगों

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